मंगलवार, 28 जुलाई 2020

सिल्क सिटी की राहों ने फिर सुना सन्नाटा

 सिल्क सिटी की राहों ने एक बार फिर सन्नाटे को सुना। गुरुवार को लॉकडाउन पूरी तरह प्रभावी दिखा। दोपहर में शहर की सड़कें सूनी थीं। दुकानें बंद थींं। इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे थे। कुछ बिक रहा था तो मास्क और सैनिटाइजर। सड़क किनारे सब्जी की दुकानें आम दिनों की तरह सजी थीं, लेकिन खरीदार नहीं पहुंच रहे थे। कल तक जो टमाटर 80 रुपये प्रति किलो में इठला रहा था, आज उसकी कीमत गिर कर 60 हो गई थी। हालांकि, गली-मुहल्लों में राशन आदि की दुकानों के शटर आधे खुले थे। ग्राहकों के अनुरोध पर दुकानदार सामान दे रहे थे। ऐसा नहीं था कि इस सबके लिए पुलिस-प्रशासन को खूब मशक्कत करनी पड़ी हो। यह सब स्वत: स्फूर्त दिख रहा था। मानों लोगों ने समझ लिया हो कि घर में रहकर ही खुद को सुरक्षित और कोरोना को हराया जा सकता है। 
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बरारी रोड, समय : 02:00 बजे
रोड पर चहल-पहल न के बराबर है। हां, कुछ एक बाइक सवार थोड़े अंतराल पर आते-जाते जरूर दिख रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड चौराहे पर भी लगभग दुकानें बंद हैं। माउंट कार्मेल के सामने एक औरत टोकरी में आम लिए बैठी है, लेकिन वहां कोई भी खरीदार नहीं है। सरकारी बस डीपो के अंदर विरानी छाई है। बस एक टेंपो खड़ा है। 
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तिलकामांझी चौक, समय : 02:05 बजे 
यहां कुछ बिहार पुलिस और रैफ के जवान दिख रहे हैं। तेज धूप होने के कारण सभी पेड़ के नीचे खड़े हैं। यहां स्टेशन की ओर से एक ई-रिक्शा आता दिख रहा है, लेकिन उसपर केवल एक सवारी बैठा है। बेरोक-टोक चौराहे से होते हुए ई-रिक्शा जीरोमाइल की ओर बढ़ जाता है। मेडिकल कॉलेज रोड में थोड़ी दूर आगे बढऩे पर कुछ सब्जी की दुकानें सजी हैं, लेकिन ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं। 

रानी लक्ष्मीबाई चौक 02:10 बजे  
आम दिन तो यहां हमेशा पुलिस के जवान तैनात रहते दिखते हैं, लेकिन आज यहां एक भी जवान नहीं हैं। चौक से कुछ दूर साइकिल पर मास्क की दुकान सजाए एक-दो युवक दिख रहे हैं। लोगों की चहल-पहल यहां न के बराबर है। 

आदमपुर चौक, समय : 02:15 बजे 
यहां पर कुछ लोग आते-जाते दिख रहे हैं। साथ ही चौक के पास सब्जी मंडी में कुछ दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते दिख रहे हैं। हालांकि, गिनती के एक-दो खरीदार ही यहां दिख रहे हैं। यहां पुलिस के जवान नहीं दिख रहे हैं। 

बूढ़ानाथ मंदिर रोड, समय : 02:25 बजे 
बूढ़ानाथ मंदिर की ओर जाने वाली सड़क सूनी दिखी। साथ ही चौक पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि, गली में कुछ दुकानें खुली हैं। दुकानदारों ने आधे शटर को खोल कर रखा है। ग्राहकों के आने पर वे शटर को पूरा खोलते हैं और सामन देने के बाद शटर को फिर से नीचे सरका देते हैं। यहां मोहल्ले के एक-दो युवक घर के बाहर टहलते दिख रहे हैं। 

गोलाघाट रोड, समय : 02:30 बजे 
यहां लॉकडाउन का असर सबसे अधिक दिख रहा है। सड़क पर सन्नाटा पसरा है। दुकानों के शटर भी बंद हैं। थोड़े अंतराल पर यहां से एक दो गाडिय़ां गुजरीं, जिसने सन्नाटे में खलल डाला। 

सराय चौक, समय : 02:45 बजे 
चौराहे पर दो रिक्शा चालक सवारियों का इंतजार करते दिख रहे हैं। लोगों की आवाजाही न के बराबर है। महादेव सिंह कॉलेज की ओर जाने वाली सड़क पर पूरा सन्नाटा पसरा हुआ है। हां, एक दो मोबाइल की दुकानें खुली हैं, पर खरीदार यहां भी नहीं दिख रहे हैं। 


विवि गेट, समय : 03:00 बजे 
सालों भर विद्यार्थियों से गुलजार रहने वाला यह इलाका वीरान है। विवि गेट के सामने की सभी चाय और नाश्ते की दुकानें बंद हैं। आगे बढऩे पर विवि स्टेडियम के पास के चौराहे पर कुछ जवान तैनात हैं। पर, यहां भी कोई आदमी नहीं दिख रहा। यहीं स्थिति मारवाड़ी कॉलेज के सामने भी है। 


टीएनबी कॉलेज गेट 03:10 बजे 
विवि थाने का गश्ती दल यहां पुलिस गाड़ी लगा कर खड़ी है। नाथनगर की ओर से स्टेशन की ओर कुछ बाइक सवार आते-जाते दिख रहे हैं। आगे बढऩे पर परबत्ती चौक के पास कुछ लोग रोड किनारे खड़े होकर बातचीत करते दिख रहे हैं। यहां कुछ चाय-पान की दुकानें खुलीं हैं। 


तातारपुर चौक, समय : 03:15 बजे
लॉकडाउन का असर यहां पर कम दिख रहा है। अन्य चौक-चौराहे की तुलना में यहां लोगों का चहल-पहल ज्यादा है। चौक के पास पुलिस की गाड़ी लगी है। सभी जवान गाड़ी में बैठे हैं। यहां एक दो राशन की और कुछ चाय की दुकानें खुली हैं। 

स्टेशन चौक, समय : 03:30 बजे
यहां तातारपुर की तरफ स्टेशन गेट के सामने करीब दस रिक्शा चालक खड़े हैं, लेकिन लोग यहां नहीं दिख रहे हैं। गेट के सामने चाय-पान की तीन दुकानें खुली हैं। दुकान के सामने एक-दो लोग चाय पीते दिख रहे हैं। आगे बढऩे पर एक फल की दुकान खुली है। ग्राहक नहीं हैं। लोहिया पुल के नीचे लोग सब्जी और राशन खरीदते दिख रहे हैं। 


कोयला डिपो बस स्टैंड, समय : 03:35 बजे 
यहां रोड किनारे करीब आधा दर्जन सब्जी की दुकान लगी है। पास ही कुछ रिक्शा चालक भी सवारी का इंतजार करते दिख रहे हैं। चौक पर ही दो-तीन बीज भंडार भी खुले हैं। बस स्टैंड में कुछ गाडिय़ां खड़ी हैं, लेकिन न तो वहां एक भी ड्राइवर दिख रहे हैं और न ही कोई और। 

त्रिमूर्ति चौक, समय : 03:40 बजे
स्टेशन की तरफ से आगे बढऩे पर चौक से पहले एक निजी क्लिनिक के बार दो एंबुलेंस खड़ी है। एंबुलेंस को कुछ लोग घेरे खड़े हैं। पास पहुंचने पर पता चला कि सड़क दुर्घटना में घायल एक गंभीर मरीज को लाया गया है। क्लिनिक के पास की मेडिकल दुकानें खुली हैं। चौके से आगे बढऩे पर मीट की अधिकांश दुकानें खुली दिख रही हैं। पर, खरीदार यहां भी नहीं दिख रहे हैं। 

भागलपुरिया जर्दालू और कतरनी की प्रोसेसिंग अब मुबई में जर्दालू आम और कतरनी चूड़ा सिल्क सिटी भागलपुर की पहचान रही है। हाल के वर्षों में इसकी ख्याति क्षेत्र और राज्य की सीमाओं को लांघकर कर विदेशों तक जा पहुंची है। भागलपुर के इन उत्पादों को और व्यापक फलक पर ले जाने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन इस वर्ष कोरोना ने इसकी गति पर ब्रेक लगा दिया। सुल्तानगंज के किसान मुंबई में इसकी प्रोसेसिंग पर काम कर रहे हैं। इसके लिए अजगैवीनाथ किसान उत्पाद संगठन बनाया है। इस संगठन ने मुंबई की एक कंपनी के साथ करार भी किया गया है। जर्दालू के पल्प से जूस और अन्य उत्पाद तैयार किए जाने हैं। कोरोना के कारण इस बार आम की आपूर्ति बहुत कम हो सकी। अब ये लोग कतरनी की प्रोसेसिंग के लिए काम कर रहे हैं। कतरनी धान से पोहा और अन्य उत्पाद तैयार कर देश और देश के बाहर इसका निर्यात किया जाएगा। समूह में करीब 150 किसान जुड़े हैं। सभी कतरनी और जर्दालू के उत्पादक हैं। इसमें कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) भागलपुर का बराबर सहयोग मिल रहा है। रुकेगा पलायन, सामूहिक खेती को मिलेगा बढ़ावा समूह से जुड़े किसान अनुरंजन सिंह, राहुल देव, उपेंद्र सिंह, अनिल कुमार ने बताया कि मुंबई में कतरनी और जर्दालू की प्रोसेसिंग होने से किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा। किसानों के पलायन पर रोक लगेगी। किसानों ने बताया कि अभी छोटे स्तर पर कतरनी की खेती कर रहे हैं, उचित कीमत मिलने से इसे व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। इससे सामूहिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। समूह के किसान साथ-साथ मिलकर समृद्धि की कहानी लिखेंगे। कुंदन के प्रयास से संगठित हुए किसान जर्दालू और कतरनी की प्रोसेसिंग शुरू कराने के लिए भागलपुर के सुल्तानगंज निवासी कुंदन पिछले डेढ़ साल से काम कर रहे हैं। रांची के बिरला टेक्निकल संस्थान से बीटेक और बेल्जियम से एमबीए करने वाले कुंदन ने कतरनी और जर्दालू पर काफी शोध किया है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के कारण अभी छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की गई है। जल्द ही दोनों उत्पादों को समूह विदेश भी भेजेगा। जर्दालू और कतरनी उत्पादक किसानों ने अजगैवीनाथ किसान समूह का गठन किया है। आत्मा की ओर से इन किसानों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है। प्रभात कुमार सिंह, उप परियोजना निदेशक, आत्मा, भागलपुर