कल रात को लगभग 10:30 को मैं भागलपुर से रजौन अपने घर बाइक से लौट रहा था । रोड पुरी तरह से जाम था, मै रोड के साइड से निकल रहा था, जब मैं जगदीशपुर के पास पहुँचा तो मैं हैरान रह गया, बिहार पुलिस ट्रक वालों से पैसा वसुलने में लगी थी। उसे जाम से कोई मतलब नहीं थी। लगभग 2 KM बाद फिर रजौन पुलिस पैसा वसुलने मे लगी हुई थी। मैंने तुरंत SSP भागलपुर को फोन और मैसेज के माध्यम से सूचीत किया, उन्होंने मुझे इस पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया । उसके बाद मैं घर की ओर चल पड़ा, लेकिन एक पत्रकार और एक सजग नागरिक होने के नाते, अब मैंने ठान लिया कि मैं बिहार पुलिस के इस रवैये को यथासंभव ,कानून के समक्ष ला कर उन्हें कटघरे मे खड़ा करने का प्रयास करूँगा । अभिषेक राव ।
मंगलवार, 31 मई 2016
शुक्रवार, 20 मई 2016
माँ तेरा जो साथ था
कुछ पल का साथ था, एक सुखद एहसास था , जब तक तेरा साथ था माँ ।। माँ, मेरे प्यार के आगे तूने हर खुशियाँ वारी।तेरे प्यार के आगे सारे जग की प्यार भी फिकी।। माँ तेरे वगैर ,मेरा दर्द समझता कौन ।रातों को नींद से जग कर लोरी फिर सुनता कौन ।खुद जग कर, सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन ।।हसना, खेलना, गिरना- गिर कर चलना तूझसे सिखा माँ ।अब तो वो सब सिर्फ एक यादे बन कर रह गई माँ । तेरा मेरा बस कुछ पल का साथ था माँ, छनिक खुशियों का साथ था माँ । आ के लूटा दी तूने मुझपर सारे जग की प्यार, फिर अकेले छोड़ गई मुझे इस संसार ।। स्वर्ग सा एहसास था माँ, जब तक तेरा साथ था माँ । जीवन के सफर में ना अपनों से डरता था, ना सपनौ से डरता था। ना वर्तमान से डरता था, ना भविष्य से डरता था ।लेकिन तेरे बिना ,कदम -कदम पर ठोकरे खूब खाता हूँ । गैरो की क्या कहें, अपनों से भी डरता हूँ ।। सोचा था, पल-पल नहीं, हर पल तेरा साथ होगा माँ ।दो-चार दिनों की नहीं, जीवन -मरन का साथ होगा माँ ।लेकिन किसने सोचा था कल को , पल-पल का नहीं,केवल कुछ पलो का साथ था तेरा माँ ।जीवन भर की क्या कहें, दो-चार दिनों का साथ था केवल तेरा माँ ।।एक सुखद एहसास था माँ, जब तक तेरा साथ था माँ ।गम तो थे ,मगर तेरी खुशियों के आगे कम थे। बातें करने को बहुत थे, मगर समय बहुत कम थे।सपने बहुत थे, मगर राते बहुत कम थे।। अब तो केवल तेरी बातें याद दिलाती है, हमेशा साथ होने का एहसास कराती है।तेरी बताई राहे मुझको मंजिल की ओर बढ़ाती है।भीड़ भरी इस दुनिया में केवल तेरी यादें मुझे तनहाई से बचाती है। माँ अब तो जैसे बदल गया संसार मेरा।भीड़ भरी राहों में भी खुद को अकेला पाता हूँ ।सामर्थ्य भरी जिंदगी में खुद को असहाय पाता हूँ ।लज्जा भरी निगाहों में भी खुद को निरलज पाता हूँ ।निडर भरी जीवन में भी खुद को भयभीत पाता हूँ ।इमारतों से भरी इस शहर में खुद को बेघर पाता हूँ ।। एक सुखद एहसास था, तेरा जो साथ था माँ ।अब तो सुनी सुनी जग की सारी खुशियाँ, भीड़ भरी दुनिया मुझे लगती है पराई, एक तेरा ही चेहरा मुझको अपनों की याद दिलाती । एक सुखद एहसास था माँ
मंगलवार, 17 मई 2016
रंग और सूरज का मिलन
रंग और सूरज का हुआ मिलन,आशाओ से खिल गया चमन।। भाग्य विधाता ने स्वीकारा, हम दोनों का ये मिलन।।हजारे जख्म थे दफन सिने में, अब वो स्वतः भर गये ।।सफर जो अब तक था अधूरा, अब वो पूरा हो गये । रंग और सूरज ......, सफर में हम अकेले निकले, हम सफर अब मिल गये ।प्यास जो अब तक थी अधूरी, प्यास भी वो अब बुझा गये ।। रंग और सूरज ....., गम और उदासी का था वो मंजूर,अब के रंग से कम थे।तनहाई के दिन लद गये, अब तो रंग से भर गया जीवन ।। रंग और सूरज ....., मांग जो तेरी अब तक सुनी, भर दिया मैं खुशियों से।हाथों में मेहँदी रचाने का ,बालों में गजरा सजाने का ,निमित्त बना मैं तेरे जीवन का।रंग और सूरज ....., वादा जो किया है तुमसे वादा तो निभाना है। पल-पल का नहीं, हर पल का साथ निभाना है । रंग और सूरज .....,जीवन रूपी समंदर में, नित्य नौके की भाती लहरों से टकराना है।फिर भी धैर्य और विश्वास के मंत्र से एक दूजे का साथ निभाना है । रंग और सूरज ......., रुठना-मनाना लगा रहेगा ,दाम्पत्य जीवन का यही तो आनंद है।विश्वास और समर्पण हो ना कम, ध्यान इस पर रखना है।रंग और सूरज का हुआ मिलन, आशाओ से खिल गया चमन।। by- Abhishek Rao, dedicated to - Suraj bhaya and Rang bhavi
रविवार, 15 मई 2016
एक चहकती चुलबुली
उन्मूक्त विचारों की वो बुलबुल, सबसे प्यारी सबसे न्यारी।। ना इठलाती ना इतराती, ना तो करती किसी की बुराई, हरदम सोचे सबकी भलाई ।। सारे जहाँ को गले लगाती, दुश्मन को भी दोस्ती सिखलाती।। झील समान है उसके नयना, बया करती उसके मन की गहराई ।। मुस्कान है उसकी सबसे प्यारी, जो मिटा दे गमो को सारी ।। समय का रखती पुरा ध्यान, अनुशासन प्रिय उसकी पहचान ।। बुद्धि, विचार, किर्ती गान की स्मृति, चंचल, चुलबुली इरादों की स्मृति ।।
वो परी
कविता - "वो चंचल, मधुरभाषी ना जाने आज क्यूँ उदास बैठी थी। ना जाने क्यूँ डलहन सी उसकी आॅखे भीगी -भीगी थी।खिलता हुआ चेहरा ना जाने क्यूँ गंभीर थी। घनघोर सन्नाटे को चिरने वाली उसकी चहकती हुईं जुबान क्यूँ खामोश थी।औरों के ऑशू को पोछने वाली, आज ना जाने क्यूँ खुद ऑशू बहा रही थी।हर वक्त चेहरे को निहारने वाली, ना जाने क्यूँ खुद से खिन्न थी। ना जाने आज वो किस बात को लेकर व्यथित थी।"
हिमाचल का मौसम
मेरी कविता - " हिमाचल की खूबसूरत वादिया, मौसम का क्या केहना।वो अगस्त का आना, रिमझिम बरसात को लाना। वो झूमता मधमस्त जंगल, टिहटियाता हुआ झिंगुर, वो आशमान को ढके बादल। मौसम का क्या ......। वो कालका से शिमला तक की छोटी सी दूरी, लम्बी यात्रा। वो पहाड़ों और जंगलों के सन्नाटे के बीच से गुजरात हुआ छोटी ट्रेन । हिमाचल का क्या ......। दिसम्बर का महीना, मौसम का क्या केहना। वो कूल्लू- मनाली की सर्दीया ,वो शिमला की मस्ती भरी हिमपात की चाॅदनी राते ।हिमाचल के मौसम का क्या केहना। कवि - अभिषेक राव ।
सोमवार, 2 मई 2016
विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2016, भारत को 118 वाॅ स्थान
UNO द्वारा जारी चौथा विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2016 में इस बार 157 देशों को शामिल किया गया है ।इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का सबसे खुशहाल देशों में शीर्ष स्थान पर डेनमार्क को रखा गया है ।भारत का स्थान 118 है, जो पिछले वर्ष की तुलना में खराब है ।पिछले वर्ष भारत का स्थान 117 वाॅ था ।वही भारत के सारे पड़ोसी देशों की स्थिति बेहतर बताई गई है भारत के तुलना में ।भूटान -84 वाॅ, चीन - 83 वाॅ, पाकिस्तान -92 वाॅ, नेपाल -107 वाॅ, और बंगलादेश को 110 वाॅ स्थान पर रखा गया है । साथ ही साथ रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत दुनिया के उन शिर्ष 10 देशों में शामिल है जहाँ खुशी के पैमाने में सबसे अधिक गिरावट आइ है।विकसित देशों में अमेरिका -13 वाॅ, ब्रिटेन -23 वाॅ, और जापान को 53 वे स्थान पर दर्शाया गया है । इसके सर्वे हेतु 6 स्तर पर डाटा जुटाई जाती है । वास्तविक जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय,जन्म के समय स्वस्थ जीवन, मनचाहा जीवन जीने की स्वतंत्रता, संकट के समय भरोसे मंद साथी या संस्थान से मदद की उम्मीद ।