रविवार, 13 दिसंबर 2015

भारतीय मीडिया में महिला पत्रकारों की भागीदारी

भारत में यूँ तो महिलाओं के समुचित विकास, जनभागीदारी,उचित प्रतिनिधित्व, सुरक्षा, आरक्षण जैसे मुद्दों पर हमें लगातार बहस सुनने को मिले जाते है, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है की इस बहस को लेकर जो लगातार आवाज उठाने का काम हमारे देश की मीडिया करती है, वहीं पर महिला के प्रति  सबसे ज्यादा  उदासीनता देखने को मिलती है ।वर्ष 2015 में भारतीय पत्रकारिता में महिला पत्रकारों की भागीदारी को लेकर "मीडिया स्टडीज ग्रुप" के अनुसार अगर बात किया जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर महिला पत्रकारों की भागीदारी 17% बताया गया हैं ।अंग्रेजी माध्यम के समाचार पत्रों तथा चैनलों में महिला पत्रकारों की उपस्थिति कुछ हद तक संतोष प्रद बताया गया हैं वही हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषा के समाचार पत्रों तथा चैनलों  में इनकी उपस्थिति नगण्य के बराबर है।राज्यों  के संदर्भ में अगर बात किया जाए तो 6 राज्यों तथा 2 केंद्र शासित प्रदेश (असम,झारखंड, नागालैंड,अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, पांडीचेरी,तथा दमन एवं दीव) ऐसे हैं जहाँ जिला स्तर पर महिला पत्रकारों की भागीदारी शून्य है । राज्यों के संदर्भ में आन्ध्र प्रदेश की स्थिति सबसे बेहतर माना गया हैं, वही बिहार में महिला पत्रकारों की भागीदारी 9.38% है। मीडिया हाउस की अगर बात की जाए तो प्रसार भारती की All India Radio में महिला पत्रकारों की स्थिति सबसे बेहतर माना गया हैं । आज के मौजूदा  समय के अनुसार ये अनुपात काफी चिंता और विचारणीय है ,क्योंकि हमें दूसरों को तभी सलाह देना चाहिए जब हम खुद उसका पालन करते हो।

बुधवार, 11 नवंबर 2015

बिहार विधान सभा में दागी विधायकों का दलगत प्रतिशत # 11 November 2015

243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में 58%यानी की 142   विधायक दागी है और इससे कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं है। दलगत दागी विधायकों का प्रतिशत इस प्रकार है। प्रथम: लोजपा और भाकपा माले -100%, दूसरा: भाजपा - 64.15%,तीसरा: कांग्रेस-59.26%,चौथा: राजद-57.5%,पाँचवाँ: जदयू-52.11%, छठा: रालोसपा-50% । हम: 0%,                   

सोमवार, 26 अक्टूबर 2015

मतदाता जागरूकता अभियान

लोकतंत्र की सही पहचान जन जन का हो कल्याण, आंधी रोटी जाएँगे फिर भी मतदान करने जाएंगे । पहले मतदान फिर जलपान, आदि जैसे नारे आज हमें निर्वाचन आयोग से या दूसरे कई समाजसेवी संगठनों के माध्यम से सुनने को मिल रहा हैं ।और इसके परिणाम भी साकारात्मक सिद्ध हो रहे हैं ।

शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति

भारत में शिक्षा की स्थिति कुल मिला कर संतोष प्रद नहीं कहा जा सकता है । हमारे देश में साक्षर होने के लिए वर्तमान में जो मापदंड रखे गए हैं उसके अनुसार सिर्फ आपको नाम पता लिखने आना चाहिए ।हमें अब साक्षरता के  इस मापदंडों में समय रहते सुधार करने कि आवश्यकता है । इन सब चिजो के बावजूद हमारे यहाँ उच्च शिक्षा की स्थिति काफी नाजुक है । पिछले जनगणना के अनुसार सिर्फ 8.15% भारतीय स्नातक हैं, स्नातकोत्तर की स्थिति और भी बदतर है । उच्च शिक्षा में छात्रों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2008-09 से बिना नेट उत्तीर्ण शोधार्थी छात्रों को केंद्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति दी जाती थी। लेकिन कुछ दिन पूर्व केंद्र  सरकार द्वारा बिना किसी ठोस कारण बताएँ ,इस छात्रवृत्ति योजना को बन्द करने का निर्णय लिया गया, जिससे दिल्ली समेत देश के तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों में सरकार के इस निर्णय के प्रति आक्रोश हैं । सरकार को आपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है ।ताकि छात्रों का उच्च शिक्षा के प्रति मोह भंग ना हो जाए ।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015

आस्था और पशु हत्या

वर्षों से चली आ रही एक प्रथा जिसमें आस्था के नाम लाखों निर्दोष पशुओं कि बलि चढ़ा दी जाती है ।और आश्चर्य कि बात तो ये है कि लोग इसे पुनीत कार्य समझते हैं ।जो पुरी तरह से अंधविश्वास पर केंद्रित हैं ।

राजनीतिक व्यंग्य

बचपन से हमलोग पढ़ते आए हैं कि गया एक चौपाया जानवर हैं, लेकिन अब हमें पड़ना चाहिए कि गया एक राजनीतिक जानवर हैं । इसका उपयोग हमारे तथाकथित राजनेताओं द्वारा अपने वोट बैंक के लिए किया जाता हैं ।