भारत में शिक्षा की स्थिति कुल मिला कर संतोष प्रद नहीं कहा जा सकता है । हमारे देश में साक्षर होने के लिए वर्तमान में जो मापदंड रखे गए हैं उसके अनुसार सिर्फ आपको नाम पता लिखने आना चाहिए ।हमें अब साक्षरता के इस मापदंडों में समय रहते सुधार करने कि आवश्यकता है । इन सब चिजो के बावजूद हमारे यहाँ उच्च शिक्षा की स्थिति काफी नाजुक है । पिछले जनगणना के अनुसार सिर्फ 8.15% भारतीय स्नातक हैं, स्नातकोत्तर की स्थिति और भी बदतर है । उच्च शिक्षा में छात्रों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2008-09 से बिना नेट उत्तीर्ण शोधार्थी छात्रों को केंद्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति दी जाती थी। लेकिन कुछ दिन पूर्व केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी ठोस कारण बताएँ ,इस छात्रवृत्ति योजना को बन्द करने का निर्णय लिया गया, जिससे दिल्ली समेत देश के तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों में सरकार के इस निर्णय के प्रति आक्रोश हैं । सरकार को आपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है ।ताकि छात्रों का उच्च शिक्षा के प्रति मोह भंग ना हो जाए ।
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