पटना में मैं जिस जगह रहता हूँ, ठीक उसके बगल में वर्तमान पार्षद का घर है ।मेहरारु दस वर्ष से पार्षद थी सो वे पार्षद पति की कुर्सी पर दस वर्ष से काबिज हैं । इस बार आरक्षण की बंदिशें समाप्त होने की वजह से खुद चुनावी मैदान में हैं । आज उन्हें कलेक्ट्रेट आॅफिस में पर्चा दाखिल करना था, सुबह से ही उनके दरवाजे पर चहल-पहल थी । लेकिन आखिरी वक्त तक माननीय के अपेक्षाओं के अनुरूप 'नारेबाजों' की संख्या काफी कम थी। अंत में माननीय ने उस वार्ड के सारे सफाई कर्मचारी को जुलूस में शामिल कर लिया । लेकिन फिर भी माननीय के चेहरे पर निराशा के बादल छाए हुए थे। कमोबेश पटना नगर निगम के अधिकांश वर्तमान पार्षदों का यही हाल है । सरकारी तंत्र का अपने सुविधा के अनुसार उपयोग करना ।
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शुक्रवार, 5 मई 2017
निकाय चुनाव में सरकारी तंत्र का उपयोग
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