रविवार, 5 जून 2016

व्यंग्य, सुशासन पर

अभिषेक राव-
☄सुशासन - सुशासन की रट लगाते।
कुसाशन की परवाह नहीं ।।
☄लूट मची है, प्रदेश में सारे।
मस्त है नेता, पस्त है जनता,
अपराधी, ठेकेदार अच्छे दिनों के चेक को जम कर भूना रहे, ।
लोगों की परवाह नहीं ।।
☄ केवल दल की नही, दलालों की भी सरकार है ।
जनता से ज्यादा, नेताओं की भरमार है।।
☄खाकी, खादी का ये कैसा बेमिसाल गठजोड़ है।
अपराधी के दरवार में, मंत्री जी हाजिरी लगाते है।
☄लोकतंत्र के पहरेदार (पत्रकार) भी इनके आगे बेबस नजर आते है ।
अभिषेक राव

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