मंगलवार, 7 जून 2016

मच्छड पर व्यंग्य

@अभिषेक राव @
ना जाने  ये मच्छड क्यूँ,
मच्छडदानी में चले आते है।
दिन को गायब,
रात में नजर आते है।
माँ-बाप कहते,
बेटा तू खून मेरा है,।
फिर ये मच्छड ना जाने,
क्यूँ हक जमाते है ।

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