बुधवार, 8 जून 2016

मेरा बिहार बदल रहा

अभिषेक राव
रट लगवाते नेता जी
जय-कारा लगाते चमचा जी,
बिहार मेरा बदल रहा।।

साहित्यकार-पत्रकार मर रहे
कलाकार अपमानित हो रहे
खिलाड़ी सड़कों  पर पसीना बहा रहे
क्योंकि अब मेरा बिहार बदल रहा ।।

ठेकेदार लूट मचा रहे
अपराधी दरबार लगा रहे
नेता हुक्म चला रहे
पुलिस-प्रशासन मौज उड़ा रहे
क्योंकि, अब बिहार मेरा बदल रहा ।।

विद्यालय अब भोजनालय में बदल रहे
गुरु जी खाना पकवा रहे
बच्चे खाने को आ रहे
टाॅपर फेल हो रहे
क्योंकि अब मेरा बिहार बदल रहा ।।

मुखिया जी मनरेगा में छेदा लगा रहे
घर वालों को भी इंदरा आवास दिलवा रहे
विधायक जी कागजो पर ही शौचालय बनवा रहे
फाइलो में ही चापाकल गड़ रहे
क्योंकि अब मेरा बिहार बदल रहा ।।

सरकारी बाबू मस्ती मना रहे
सुशासन बाबू गठबंधन धर्म निभा रहे
मंत्री-विधायक रौब जमा रहे
क्योंकि अब मेरा बिहार बदल रहा ।।   अभिषेक राव

मंगलवार, 7 जून 2016

मच्छड पर व्यंग्य

@अभिषेक राव @
ना जाने  ये मच्छड क्यूँ,
मच्छडदानी में चले आते है।
दिन को गायब,
रात में नजर आते है।
माँ-बाप कहते,
बेटा तू खून मेरा है,।
फिर ये मच्छड ना जाने,
क्यूँ हक जमाते है ।

रविवार, 5 जून 2016

शराब बंदी पर व्यंग्य

🔸अभिषेक राव🔸
⚱सात निश्चय की मजबूरी है,
शराब बंदी की यही कहानी है।
⚱महिलाओं, बुजुर्गों से किया वादा तो निभानी है।
इस लिए शराब बंदी तो जरूरी है ।
⚱शराब कारोबारी, हो ना नाराज,
सब का साथ, सब का विकास तो जरूरी है ।
इस लिए तुम्हारी चिंताओं को देख,
तुम्हारे लिए एक युक्ति ठान रख्खा है,
शराब की जगह, शुधा लस्सी अब तुम्हें पिलानी है।
⚱पुलिस - प्रशासन होशियार,
शराब पकड़ने को तैयार ।।
बच के रहना माफिया,
शोर मचाती ये सरकार ।
अगर जरा भी दिखे लापरवाह,
जाओ गे सिधे कारावास ।।
खुब डराती ये सरकार ।।।

व्यंग्य, सुशासन पर

अभिषेक राव-
☄सुशासन - सुशासन की रट लगाते।
कुसाशन की परवाह नहीं ।।
☄लूट मची है, प्रदेश में सारे।
मस्त है नेता, पस्त है जनता,
अपराधी, ठेकेदार अच्छे दिनों के चेक को जम कर भूना रहे, ।
लोगों की परवाह नहीं ।।
☄ केवल दल की नही, दलालों की भी सरकार है ।
जनता से ज्यादा, नेताओं की भरमार है।।
☄खाकी, खादी का ये कैसा बेमिसाल गठजोड़ है।
अपराधी के दरवार में, मंत्री जी हाजिरी लगाते है।
☄लोकतंत्र के पहरेदार (पत्रकार) भी इनके आगे बेबस नजर आते है ।
अभिषेक राव

पत्रकार की हत्या पर व्यंग्य

🔸साहित्यिक और पत्रकार, लोकतंत्र के प्रहरी कहे जाते हैं ।
लेकिन बिहार में इनकी कोई औकात नहीं ।।
🔸दिन - दहाडे हो रही हत्या ।
फिर भी सरकार को कोई अफसोस नही ।।
🔸कहने को ये समाज के अग्रदूत ।
लेकिन खुद ही असुरक्षित है, महादूत।।
🔸कहने को ये चौथा स्तंभ ।
लोकतंत्र से कराती हमारी पहचान ।।
🔸ये कलम के सिपाही हैं ,
समाज को नित्य आईना दिखाते है।
इनके कारण जनता के आगे घुटनों के बल खड़ी सरकार ।
पुलिस - प्रशासन को भी लगती हरदम इनके कारण फटकार ।।
🔸लोग सुनाते इनको अपनी दुखडा।
इनकी दुखडा सुनता कौन ।।   🔶अभिषेक राव 🔶

मंगलवार, 31 मई 2016

बिहार पुलिस द्वारा अवैध वसुली

कल रात को लगभग 10:30 को मैं भागलपुर से रजौन अपने घर बाइक से लौट रहा था । रोड पुरी तरह से जाम था, मै रोड के साइड से निकल रहा था, जब मैं जगदीशपुर के पास पहुँचा तो मैं हैरान रह गया, बिहार पुलिस ट्रक वालों से पैसा वसुलने में लगी थी। उसे जाम से कोई मतलब नहीं थी। लगभग 2 KM बाद फिर रजौन पुलिस पैसा वसुलने मे लगी हुई थी। मैंने तुरंत SSP भागलपुर को फोन और मैसेज के माध्यम से सूचीत किया, उन्होंने मुझे इस पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया । उसके बाद मैं घर की ओर चल पड़ा, लेकिन एक पत्रकार और एक सजग नागरिक होने के नाते, अब मैंने ठान लिया कि मैं बिहार पुलिस के इस रवैये को यथासंभव ,कानून के समक्ष ला कर उन्हें कटघरे मे खड़ा करने का प्रयास करूँगा । अभिषेक राव ।

शुक्रवार, 20 मई 2016

माँ तेरा जो साथ था

कुछ पल का साथ था,        एक सुखद एहसास था ,       जब तक तेरा साथ था माँ ।। माँ, मेरे प्यार के आगे तूने हर खुशियाँ वारी।तेरे प्यार के आगे सारे जग की प्यार भी फिकी।।        माँ तेरे वगैर ,मेरा दर्द समझता कौन ।रातों को नींद  से जग कर लोरी फिर सुनता कौन ।खुद जग कर, सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन ।।हसना, खेलना, गिरना- गिर कर चलना तूझसे सिखा माँ ।अब तो वो सब सिर्फ एक यादे बन कर रह गई माँ । तेरा मेरा बस कुछ पल का साथ था माँ, छनिक खुशियों का साथ  था माँ । आ के लूटा दी तूने मुझपर सारे जग की प्यार, फिर अकेले छोड़ गई मुझे इस संसार  ।। स्वर्ग सा एहसास था माँ, जब तक तेरा साथ था माँ । जीवन के सफर में ना अपनों से डरता था, ना सपनौ से डरता था। ना वर्तमान से डरता था, ना भविष्य से डरता था ।लेकिन तेरे बिना ,कदम -कदम पर ठोकरे खूब  खाता हूँ । गैरो की क्या कहें, अपनों से भी डरता हूँ ।। सोचा था, पल-पल नहीं, हर पल तेरा साथ होगा माँ ।दो-चार दिनों की नहीं, जीवन -मरन का साथ होगा माँ ।लेकिन किसने सोचा था कल को , पल-पल का नहीं,केवल  कुछ पलो का साथ था  तेरा माँ ।जीवन भर की क्या कहें, दो-चार दिनों का साथ था केवल तेरा माँ ।।एक सुखद एहसास था माँ, जब तक तेरा साथ था माँ ।गम तो थे ,मगर तेरी खुशियों के आगे कम थे। बातें  करने को बहुत थे, मगर समय बहुत कम थे।सपने बहुत थे, मगर राते बहुत कम थे।। अब तो केवल तेरी बातें याद दिलाती है, हमेशा साथ होने का एहसास कराती है।तेरी बताई राहे मुझको मंजिल की ओर बढ़ाती है।भीड़ भरी इस दुनिया में केवल तेरी यादें मुझे तनहाई से बचाती है। माँ अब तो जैसे बदल गया संसार मेरा।भीड़ भरी राहों में भी खुद को अकेला पाता हूँ ।सामर्थ्य भरी जिंदगी में खुद को असहाय पाता हूँ ।लज्जा भरी निगाहों में भी खुद को निरलज पाता हूँ ।निडर भरी जीवन में भी खुद को भयभीत पाता हूँ ।इमारतों से भरी इस शहर में खुद को बेघर पाता हूँ ।। एक सुखद एहसास था, तेरा जो साथ था माँ ।अब तो सुनी सुनी जग की सारी खुशियाँ, भीड़ भरी दुनिया मुझे लगती है  पराई,  एक तेरा ही चेहरा मुझको अपनों की याद दिलाती । एक सुखद एहसास था माँ