उन्मूक्त विचारों की वो बुलबुल, सबसे प्यारी सबसे न्यारी।। ना इठलाती ना इतराती, ना तो करती किसी की बुराई, हरदम सोचे सबकी भलाई ।। सारे जहाँ को गले लगाती, दुश्मन को भी दोस्ती सिखलाती।। झील समान है उसके नयना, बया करती उसके मन की गहराई ।। मुस्कान है उसकी सबसे प्यारी, जो मिटा दे गमो को सारी ।। समय का रखती पुरा ध्यान, अनुशासन प्रिय उसकी पहचान ।। बुद्धि, विचार, किर्ती गान की स्मृति, चंचल, चुलबुली इरादों की स्मृति ।।
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